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लाहौल-स्पिती के ‘विश्वकोश’ के नाम से प्रसिद्ध छेरिङ् दोरजे के निधन के बाद अब रोजाना उनके बारे में अखबारों में छप रहा है। यह भी सुनने में आया है कि ‘अटल (रोहतांग) टनल’ (Atal Tunnel) में उनकी स्मृति में कुछ किया जाएगा ?

जब 3 अक्तूबर, 2020 के दिन देश के प्रधानमंत्री द्वारा टनल (Atal Tunnel) का उद्घाटन हुआ था, तब तो छेरिङ् दोरजे का कहीं कोई ज़िक्र तक नहीं था। यहां तक कि टनल से पहली बार (सच तो यह कि उनमें कई लोग टिप्परों में कई बार आ जा चुके थे) गुजारे जाने वाले 15 वरिष्ठ नागरिकों में तक नहीं थे, वे। तब भी कोई इस मामले में नहीं बोला था।

हां! मैंने 4.10.2020 को एफ़बी और ट्वीटर पर अवश्य लिखा था- ‘अटल (रोहतांग) टनल’ उद्घाटन- कृत्घनता का न कारण, न सीमा।
विषय से सबसे अधिक जुड़े व्यक्ति छेरिंग दोरजे का न कोई जिक्र, न कहीं जगह?

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इस सब से मुझे तकलीफ बहुत हुई थी, जब उनका ज़िक्र नहीं हुआ था। अव्वल तो उन्हें पीएम से मिलवाया जाता, सम्मान किया जाता। परन्तु हद दर्जे की घटिया राजनीति के चलते लाहौल-स्पिती के कई सुपात्र अग्रणी व्यक्तियों को उनका यथोचित सम्मान भी नहीं मिल पाया।

यह ठीक है उस समय वे घुटने के दर्द के कारण चलने-फिरने में असमर्थ थे। लेकिन उनको उनके घर, जो कि मोटर रोड़ पर है, से ले जाया जा सकता था। पूरे लाहौल और पांगी के अन्दर एक वही थे, जिनके अन्दर टनल एक ‘स्थायी सपने’ की तरह रच बस चुका था। जब भी मेरी उनसे मुलाक़ात होती थी, टनल का जिक्र जरूर होता था। यद्यपि टनल पर मेरा अपना एक दृष्टिकोण था।

पीछे जब मेरी पुस्तक ‘संविधान के सामाजिक अन्याय, खंड-4’ छप कर आई तो मैंने पुस्तक की ‘पहली प्रति’, 22.02.2020 के दिन उन्हें उनके घर बारीतुनी जा कर भेंट की। बदले में उन्हों ने आशीर्वाद स्वरूप 501 रुपये दिये और मेरे आग्रह पर अपने हस्तलेख व हस्ताक्षर में रसीद 001 भी भरी।

नमन साथी दोरजे

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