हिमाचल प्रदेश में दो-तीन दिन से जारी बारिश से कई इलाकों में जल प्रलय जैसे हालात बन हुए हैं। नदियों में जलस्तर बढ़ने से प्रदेश के तीन बांधों के गेट खोलने पड़े, जिससे रावी और ब्यास नदी का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया। कुल्लू-मनाली और चंबा में चार पुल बह गए हैं। मंडी के दवाड़ा और चंबा के तीसा में पानी हाईवे पर आ गया। कई इलाकों में तीन से चार फीट तक पानी जमा हो गया है। दो पुलों को दरारें आ गईं। चंबा के होली में एक बिजली प्रोजेक्ट में पानी घुस गया।

वहीं, इसी इलाके में कांगड़ा से लौट रहे भेड़पालकों के 300 मवेशी बाढ़ में बह गए। ब्यास में पानी के उफान के चलते मनाली से मंडी तक कई जगहों पर लोगों के फंसने की सूचनाएं हैं। रेस्क्यू के लिए सेना का हेलीकाप्टर बुलाया गया है। उधर, मनाली बस स्टैंड पर खड़ी पर्यटकों की खाली वोल्वो बस बह गई। चंबा के होली में टिपर और कुल्लू के बाशिंग में एक ट्रक समेत कई वाहनों के बहने की सूचनाएं हैं। कुल्लू में बहे ट्रक में चालक और परिचालक भी सवार थे, जिन्हें लोगों ने बहते हुए देखा। प्रशासन ने पूरे इलाके में अलर्ट घोषित कर दिया है।

पिछले दो दिन की बारिश से नदी-नाले उफान पर रहे। इससे रावी और ब्यास का पानी इतना बढ़ गया कि पंडोह, लारजी और चमेरा डैम के गेट खोलने पड़े। लारजी डैम में तो 22 मीटर तक गेट खोल दिए गए। इससे बांध के निचले इलाकों में बाढ़ के हालात बन गए। कुल्लू में मनाली से लेकर बजौरा तक ब्यास में 23 साल बाद इतना ज्यादा पानी देखा गया है। डोभी नाले में अचानक बाढ़ आने से 25 लोग फंस गए थे, जिन्हें एयरफोर्स की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया। एनएचपीसी कॉलोनी में दो लोगों के फंसे होने की सूचना पर प्रशासन तुरंत हरकत में आया और एयरफोर्स ने रेस्क्यू की कमान संभाल कर उन लोगों को सुरक्षित बचा लिया।

रोहतांग दर्रा के बंद होने से लेह, काजा व लाहौल से आए पर्यटकों समेत 40 लोगों को बीआरओ ने शनिवार देर शाम को रेस्क्यू कर मढ़ी पहुंचाया है। वहीं रोहतांग, कुंजुम दर्रा व बारालाख के बंद होने से लाहौल में कई पर्यटक फंसे है। दो दिनों से मौसम खराब रहने से रोहतांग दर्रा में 50 सेंटीमीटर से अधिक बर्फबारी रिकार्ड की गई है।

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