जब यह भी भगवान की इच्छा है
वह भी उसी की माया है
अच्छा-बुरा, सही-गलत
सफलता-असफलता
आबादी-बर्बादी
आना-जाना, जीना-मरना
सब उसी के कर्म हैं
तो
तेरा क्या काम है?
जबकि तू ने ही
उसे असंख्य-अनेक
भिन्न-भिन्न नाम दिये
मंदिर, मस्जिद, गिरजे
गुरुद्वारे बनाये
धर्मग्रंथ, पोथियां
महाकाव्य
भजन-स्तुतियां
भी तो
तू ने ही रचे हैं।
परन्तु तू है कहां ?

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