नए साल 2018 में
राजनीति के नए समीकरण बनेंगे
राज्य सभा में भाजपा
सबसे बड़ी पार्टी बनेगी।

यह तो हो ही था, क्योंकि
आज़ादी के इन सतरह सालों में
कांग्रेस परिवारवाद को सींचते-2
441 से 44 पर पहुंच गई
पूरे देश में सिमट कर
कुछ प्रदेशों में शेष रह गई।

समस्त साम्य-समाजवादी
पूजा का थाल सजाये
पूंजीवाद के मंदिरों में
लाईनों में खड़े हो गए
जितनी बड़ी कार जिसकी
उतनी बड़ी साम्यवादी हेसीयत उसकी।

क्षेत्रीय क्षत्रप सब अपने-2
खानदानों के ख्यात लिखाने लग गए,
बाप को बाहर कर दिया
कुछ थूककर चाटते रहे,
जीते जी अपने बुत बनवा लिए
कुछ ने,
तो कुछ की साड़ियों
की सेल लगानी पड़ गई।

दलित राजनीति ने भी पलटी खाई,
ब्रह्मवाद से लड़ते-2
ब्रह्मवादी बन गए
धोती-जनेऊ के लिए
प्रतीक्षा की पंक्ति में खड़े हो गए।

मुस्लिम अल्पसंख्यकों की
विचित्र समाज-राजनीति
फत्बों के बीच अधर में
कभी इसके, कभी उसके साथ
झूला झूलते/झुलाते रह गए
आदिवासियों की सोच विकसित हो
साढ़े सात प्रतिशत से
बहुत आगे बढ़ी,
अपने अस्तित्व, पहचान, अस्मिता को
पीछे छोड़, हिन्दू बनने की
प्रतियोगिता में पूरी तैयारी से
भाग लेने लग गए।

गणतन्त्र दिवस (26 जनवरी,2018) के अवसर…. समर्पित।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *